टी-वायरस: एक अधूरी याद का सच
रात के सन्नाटे में राहुल ने एक अजीब सपना देखा।
वह खुद को एक विशाल, चमकदार लेकिन भयावह लैब में पाता है। दीवारें काँच की थीं, जिनके पीछे मशीनें धड़कते दिल की तरह चमक रही थीं। उसके सामने स्क्रीन पर उसका ही नाम चमक रहा था—
“डॉ. राहुल वर्मा – पैरलल कॉन्शियसनेस प्रोजेक्ट”
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह वहाँ कैसे पहुँचा। तभी कुछ नकाबपोश लोग उसे एक पारदर्शी कैप्सूल में बंद कर देते हैं।
उनमें से एक कहता है—
“सब्जेक्ट-आर का मस्तिष्क दूसरी दुनिया की तरंगों से जुड़ चुका है… प्रयोग शुरू करो।”
राहुल को ऐसा लगा जैसे उसका दिमाग किसी और दुनिया में खींचा जा रहा हो—एक ऐसी दुनिया जहाँ वह भी डॉक्टर था, लेकिन किसी अज्ञात एजेंसी के लिए खुफिया प्रयोग कर रहा था।
प्रयोग का उद्देश्य क्या था?
क्या वे समय को मोड़ना चाहते थे?
या किसी और ब्रह्मांड से कुछ लाना?
उत्तर धुँधले थे…
जागना… या एक और सपना?
अचानक राहुल की आँख खुली।
वह खुद को एक सीक्रेट रूम में पाता है—सफेद दीवारें, मशीनों की बीप-बीप और भारी दरवाज़ा।
बाहर बोर्ड पर लिखा था:
“मैक्स हॉस्पिटल – रिस्ट्रिक्टेड एरिया”
राहुल उठने की कोशिश करता है।
उसका सिर भारी था। यादें अधूरी थीं—जैसे किसी ने उसकी स्मृति के पन्ने फाड़ दिए हों।
वह खिड़की की ओर बढ़ा। नीचे शहर था… लेकिन सब कुछ अजीब-सा शांत।
उसे लगा—
“यह अभी भी सपना है। मुझे जागना होगा।”
वह खिड़की से कूदने ही वाला था कि तभी दरवाज़ा खुला।
एक नर्स घबराकर अंदर आई।
“सर! आप क्या कर रहे हैं? आप इस अस्पताल के सीनियर डॉक्टर हैं। आज आपको क्या हो गया? आप खिड़की से बाहर किसे देख रहे हैं?”
राहुल ठिठक गया।
“मैं… डॉक्टर हूँ?”
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
नर्स ने कहा—
“हाँ सर। डॉ. राहुल। आपने खुद टी-वायरस पर रिसर्च की है।”
“टी-वायरस…?”
और तभी—
असली दुनिया का डर
राहुल की फिर से नींद टूटी।
इस बार वह अपने घर में था।
टीवी तेज़ आवाज़ में चल रहा था।
“देश में टी-वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। संक्रमित लोग हिंसक हो रहे हैं, खाना-पीना छोड़कर आम नागरिकों पर हमला कर रहे हैं…”
राहुल के हाथ काँपने लगे।
टीवी पर एक और खबर चली—
“अफवाह है कि यह वायरस एक खुफिया लैब से फैला है। कुछ सूत्रों का कहना है कि उस लैब के वैज्ञानिक ने वायरस का जेनेटिक कोड एक पैरलल यूनिवर्स से हासिल किया था…”
राहुल के दिमाग में बिजली-सी कौंधी।
वही लैब।
वही कैप्सूल।
वही स्क्रीन।
क्या वह सपना नहीं था?
क्या वह सचमुच उस प्रयोग का हिस्सा था?

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