मैं हमेशा एक जगह बैठा रहता हूं कोई विचार नहीं कोई तरंग नहीं मैं चुप चाप बस देखता हूं खुद की हकीकत को दुनिया की शोहरत को और दुख मय जीवन को मुझ से कोई पूछता भी नहीं मैं किसी को बताना भी नहीं चा…
मैं संघर्ष की एक लकीर खिंच रहा हूं उसे प्रतिदिन पानी से सिंच रहा हूं मेरा मन तो समुद्री सा शांत है लगता है उन लहरों को कोई चांद अपनी और खिंच रहा है मेरी खिंची गई लकीर अब एक खड्डा बन गई है सब …
मैं हमेशा एक जगह बैठा रहता हूं कोई विचार नहीं कोई तरंग नहीं मैं चुप चाप बस देखता हूं खुद की हकीकत को दुनिया की शोहरत को और दुख मय जीवन को मुझ से कोई पूछता भी नहीं मैं किसी को बताना भी नहीं चा…
एक सफर जो अधूरे सपनों तक जाता है मैं हर दिन संघर्ष करता हूं उन सपनों को सफर की मंजिल तक पहुंचाने की उनके लिए एक एक पल जीता हूं फिर सब कुछ भूल कर काम पर चल देता हूं काम कुछ मेहनत का नहीं है मेरा …
सुरेश अपने कमरे से बाहर झांकता है तो उसे दूर दूर तक मन को शांत कर देने वाली हरियाली दिखाई देती है घास के मैदान उसके मन को शांति से भर देते हैं इतने में ही उसे एक कॉल आता है जिसे सुनने के बाद उसके रो…
अचानक राकेश की नींद टूटती है और वह खुद को एक घने जंगल में पाता है। चारों ओर पेड़-पौधे और जंगल की खामोशी फैली हुई थी। उसकी नजरें एक बुढ़े व्यक्ति पर जाती हैं, जो धीमी आवाज में कुछ मंत्र बुदबुदा रहा था…
रमेश आज ही गाँव से शहर लौटा है वह बहुत दुखी है क्यों की उसने अपना सारा पैसा शेयर बाजार में लगाया था और उसे बहुत हानि हुई उसका आधा पैसा शेयर बाजार में डूब गया अब उसने उस आधे पैसे से अपनी बकेट लिस्ट क…
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